Rochak Jankari #3 भारी वजन तोलने वाले कांटे को "धर्म काँटा" क्यों कहा जाता है? bhari wajan tolne wale kaante ko dharamkaanta kyu kahte hain?

Rochak Jankari #3 भारी वजन तोलने वाले कांटे को "धर्म काँटा" क्यों कहा जाता है? bhari wajan tolne wale kaante ko dharamkaanta kyu kahte hain?

Rochak Jankari #3 भारी वजन तोलने वाले कांटे को "धर्म काँटा" क्यों कहा जाता है? bhari wajan tolne wale kaante ko dharamkaanta kyu kahte hain?
Rochak Jankari #3


Rochak Jankari #3 दोस्तों पुराने ज़माने में माल तोलते वक्त डंडी मारने अथवा बेईमानी से माल को कम तोलकर देना सौदागरों की आम आदत हुआ करती थी, जो की हम आम जिंदगी में देखते हैं अब भी जारी है।


दोस्तों कई इमानदार व्यापारी जो अपना व्यापर ईमानदारी से करते थे वे अपने तोलने वाले तराजू अथवा कांटे को धर्म के अनुसार सही तोलकर देने के कारन उसे धर्म काँटा कहते थे।

आपको तो यह पता ही होगा की पुराने ज़माने में तराजू को काँटा भी कहा जाता था।

Rochak Jankari #3 जब व्यवसायिक हैवी कैपेसिटी की गाड़ियां व ट्रक तोलने वाले प्लेटफार्म बैलेंस भारत में आये तो उनके वजन तोलने की सटीकता बहुत ही अच्छी होती थी, उनकी विशेषता का भरोषा दिलाते हुए किसी व्यवसायिक बुद्धि वाले व्यापारी ने अपने प्लेटफार्म तोल कांटे का नाम धर्म काँटा रख दिया था और बहुत जल्दी ही यह नाम बहुत लोकप्रिय हो गया और आजतक उसको धर्म काँटा ही कहा जाता है।


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Rochak Jankari #2 जूते से जुड़े 10 ऐसे रोचक तथ्य जानकर आप दंग रह जाओगे Shoes facts in hindi

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Rochak Jankari #2 : Amazing Shoes Facts In Hindi

Rochak Jankari #2



मुझे जूतों से प्यार है। मैं या तो भेदभाव नहीं करता, मुझे सभी प्रकार के जूते पसंद हैं: जूते, सैंडल, नोकदार और बाकी सभी। एक शैली को पसंद करने के लिए खुद को सीमित क्यों करें जब उन सभी को प्यार करने के लिए जगह हो? आइये जानते हैं जूते के रोचक तथ्य।



Rochak Jankari #2 : Amazing Shoes Facts In Hindi


1. पुरुष हील पहनने वाले पहले लोग थे। ऊँची एड़ी के जूते के साथ शुरू में पुरुषों के लिए डिजाइन किए गए थे।



2. उत्तरी अमेरिका में एकमात्र जूता संग्रहालय टोरंटो, ओंटारियो में स्थित है। यह संग्रहालय 4,500 वर्षों से लेकर अब तक के पहने जाने वाले जूते दिखाता है।



3. बाटा जूता संग्रहालय में सोनजा बाटा द्वारा प्रदर्शित किए गए संकलन हैं।




4. प्रसिद्ध जूता लेबल, जिमी चू के पीछे का नाम, 11 साल की निविदा उम्र में अपने पहले जूते को डिजाइन किया और बनाया। वह शूमेकर्स के परिवार से पैदा हुए थे, उनके पिता ने उन्हें कारीगरी सिखाई थी।



5. मंच के जूते ग्रीक अभिनेताओं द्वारा पहना जाता था ताकि स्टेटस का संकेत दिया जा सके।



6. पहला बूट 1840 में किसी के लिए नहीं बल्कि रानी विक्टोरिया के लिए डिज़ाइन किया गया था।




7. स्नीकर्स को उनका नाम मिला क्योंकि उनके रबर के तलवे शोर नहीं करते।



8. साल 1965 से 1986 तक फिलीपींस की पहली महिला के रूप में, इमेल्डा मार्कोस ने कई भत्तों का आनंद लिया। जब परिवार द्वीप से भाग गया, तो मालकानन पैलेस में 15 मिंक कोट, 508 गाउन, 1,000 हैंडबैग और 1056 जोड़े जूते मिले थे। गरीबी से त्रस्त देश के लिए विलासिता का एक बड़ा विपरीत उदाहरण।



9. आपका वेतन काम करने के लिए आपके द्वारा पहने जाने वाले जूते के प्रकार को निर्धारित कर सकता है।



10. किंग एडवर्ड II ने घोषणा की कि जूते को मापने का तरीका बारलेकॉर्न ( जौ का बीज ) का उपयोग करके था। तीन बारलेकॉर्न ( जौ का बीज ) एक इंच के बराबर थे।



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Rochak Jankari #1: टायर का रंग काला ही क्यों होता है? tyre ka rang kaala hi kyu hota hati?

Rochak Jankari #1: टायर का रंग काला ही क्यों होता है? tyre ka rang kaala hi kyu hota hati?


Rochak Jankari #1: टायर का रंग काला ही क्यों होता है? tyre ka rang kaala hi kyo hota hati?

Rochak Jankari #1



Rochak Jankari #1 दोस्तों गाड़ियों के टायर तो आप सभी ने देखे ही होंगे, साइकिल के टायर से लेकर हवाई जहाज के टायर तक सभी काले ही रंग के होते हैं, ....होते हैं न! लेकिन लेकिन लेकिन, दोस्तों क्या आपने कभी ये सोचा है की आखिर टायर का रंग हमेशा काला ही क्यों होता है? इनको बनाते समय पीला,नीला,लाल या सफ़ेद रंग क्यों नहीं दिया जाता है?



Why Tyres Are Always Black In Color In Hindi?


Rochak Jankari, दोस्तों टायर का कला रंग केवल भारत में ही नहीं बल्कि किसी भी देश में टायर हमेशा काले रंग के ही आपको देखने को मिलेगे, क्यों दोस्तों है न सोचने वाली बात!

कोई बात नहीं दोस्तों, आज हम आपको बताते हैं आखिर टायर का रंग काला ही क्यों होता है।

वैसे हम सभी यह बात तो जानते ही हैं की टायर रबर का बना होता है लेकिन जिस प्राकृतिक रबर का इस्तेमाल टायर बनाने में किया जाता है उसका रंग को स्लेटी होता है? फिर टायर काले कैसे हो सकते है!


ऐसा इसलिए होता है दोस्तों, टायर को बनाते समय इसका रंग बदल दिया जाता है और यह स्लेटी से काला बन जाता है। दोस्तों इस प्रक्रिया को vulcanization ( वल्केनाइजेशन ) कहा जाता है।

दोस्तों आपको यह भी पता होना चाहिए की प्राकृतिक रबर बहुत ज्यादा मजबूत नहीं होता है और यह बहुत जल्दी ही घिस जाता है। वाहनों में प्रयोग होने वाले टायर को अगर साधारण रबर से बना दिया जाये तो वह बहुत जल्दी घिस जायेगा और ज्यादा दिन तक नहीं चल पायेगा इसलिए दोस्तों इनमे कार्बन ब्लैक मिलाया जाता है जिससे यह बहुत अधिक मजबूत हो जाता है और कार्बन ब्लैक इसे बहुत जल्दी घिसने भी नहीं देता।

Rochak Jankari, दोस्तों कार्बन युक्त टायर प्राकृतिक रबर टायर से 10 गुने से भी ज्यादा चलता है, काले कार्बोन की कई स्टेज होती हैं। रबर कितना सख्त या मुलायम होगा यह इस बात पर निर्भर करता है की इसमें कोंसी स्टेज का कार्बन मिलाया गया है। दोस्तों इसके अलावा टायर में सल्फर भी मिलाया जाता है।


कार्बन ब्लैक से टायर का रंग काला हो जाता है। दोस्तों टायर का रंग काला होने का एक कारण यह भी है की काला रंग अल्ट्रावोइलेट किरणों से रबर को बचाता है।

बच्चों की साइकिल में रंग बिरंगे टायर इसलिए देखने को मिलते हैं क्योंकि वह रोड पर ज्यादा नहीं चलती और उनमें कार्बन ब्लैक नहीं मिलाया जाता जिससे वह टायर बहुत जल्दी घिस जाता है और वह सबसे निम्न क्वालिटी के रबर टायर ही होते हैं।



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इंसान के होठों पर पसीना क्यों नहीं आता है? insan ke hotho par pasina kyo nahi ata hai?

इंसान के होठों पर पसीना क्यों नहीं आता है? insan ke hotho par pasina kyo nahi ata hai?

इंसान के होठों पर पसीना क्यों नहीं आता है? insan ke hotho par pasina kyo nahi ata hai?


दोस्तों होंठ हमारे शारीर का एक महत्वपूर्ण अंग हैं जो की हनारे चेहरे के आकर्षण को बढ़ा देते हैं और खास तौर पर लड़किओं के चेहरे पर अच्छे होंठ का होना उनकी सुन्दरता को और भी बढ़ा देता है।

दोस्तों होंठ का रंग हमारी त्वचा के रंग से बिलकुल ही अलग होता है क्योंकि उनमे बाकि त्वचा के मुकाबले चमड़ी की परत काफी कम होती है, इसलिए हमारे होंठ गुलाबी रंग के होते हैं।


दोस्तों ऐसा कहा जाता है की जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो हमारे होंठों पर इसका असर जल्दी ही दिखाई देने लगता है।

दोस्तों अपने अक्सर देखा होगा की हमारे होठों में कभी भी पसीना नहीं आता है, क्या आपको इसके पीछे का कारन पता है?


चलिए दोस्तों आज हम आपको बताते हैं, दरअसल ऐसा इसलिए होता है की हमारे होठों के स्थान पर पसीने को पैदा करने वाली ग्रंथियां या कहें मस्पेशियाँ नहीं होती हैं जिसकी वजह से हमारे होठों पर कभी पसीना नहीं आता है और हमारे होंठ दुसरे अंगों के मुकाबले बहुत जल्दी से सूख भी जाते हैं।

जैसे जैसे इंसान की उम्र बढ़ने लगती है उसके होंठ पहले से ज्यादा पतले होने लगते हैं और दोस्तों होंठों की एक खास बात यह भी है की जिस तरह इंसान के फिंगरप्रिंट किसी अन्य व्यक्ति से मेल नहीं खाते हैं ठीक उसी तरह होंठ के प्रिंट भी किसी से मैच नहीं होते हैं।



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रोचक सवाल: ऑपरेशन में टांका लगाने के लिए किस धागे का प्रयोग किया जाता है? Which thread is used for soldering in operation?

Interesting question: Which thread is used for soldering in operation? ( रोचक सवाल: ऑपरेशन में टांका लगाने के लिए किस धागे का प्रयोग किया जाता है? )

Interesting question: Which thread is used for soldering in operation?



ऑपरेशन एक चिकित्सक उपचार होता है जिसमे एक सुई में अन्य किसी सामग्री का बना धागा डाला जाता है ताकि जीवों के ऊतकों को एक साथ कस कर बंधा जा सके।


इन टांकों का काम यह होता है की जीव के ऊतक प्राकृतिक क्रियाओं से धीरे-धीरे एक दुसरे से जुड़ सकें, इन टांकों के अंत में एकगाँठ बाँध दी जाती है।

जिस धागे का उपयोग ऑपरेशन के समय टंका लगाने के लिए डॉक्टर करते हैं उसे अक्सर भेंड या बकरियों की आंतों से बनाया जाता है कभी कभी इन्हें बनाने के लिए सूअर,घोड़ों तथा गधों की आँतों का भी प्रयोग किया जाता है और यह प्रदुषण भी नहीं फैलाता है।


दरशल कात्गार्ट द्वारा बने धागों का प्रयोग भीतरी चीर फाड़  को टांकने के लिए किया जाता है ताकि कुछ समय बाद यह अपने आप ही गल जाए।

दोस्तों हम आपको जानकारी के लिए बताये देते हैं की ऑपरेशन में दो तरह के धागों का इस्तेमाल टाँके लगाने के लिए किया जाता है, मसलन शारीर के अन्दर के हिस्से में जो टाँके लगाये जाते हैं उनमे ऐसे धागों का प्रयोग किया जाता है जो अपने आप ही निश्चित समय के बाद गल जाते हैं इससे मरीज को कोई परेशानी भी नहीं होती है वहीँ ऑपरेशन में शारीर की बहरी त्वचा पर जो तनके लगाये जाते हैं वो अपने आप नहीं गलते बल्कि उन्हें काटना पड़ता है।

यदि आपके दिमाग में भी ऐसा ही कोई रोचक सवाल हो तो हमें कमेंट में बताएं, हम आपके सवाल का जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे।


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रोचक सवाल: हवाई जहाज के पायलट के पास कुल्हाड़ी क्यों होती है? Why does an airplane pilot have an axe?

Interesting question: Why does an airplane pilot have an axe? ( रोचक सवाल: हवाई जहाज के पायलट के पास कुल्हाड़ी क्यों होती है? )

Interesting question: Why does an airplane pilot have an axe?




दोस्तों क्या आपको पता है की हवाई जहाज के पायलट के पास हमेशा एक कुल्हाड़ी रहती है जिसे आपातकाल के समय काम में लाया जाता है। कई देशों में कानून के मुताबिक पायलट को उड़ान भरने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना होता है की उन्होंने अपने हवाई जहाज के कॉकपिट में एक कुल्हाड़ी रख ली है या नहीं।

दोस्तों आम तौर पर पायलट के पास रहने वाली कुल्हाड़ी एक साधारण लकड़ी काटने वाली नहीं होती है बल्कि यह एक छोटा सा पोर्टेबल औजार होता है जिसे केवल हवाई जहाज के कॉकपिट में रखा जाता है ताकि जहाज में आग लग जाने पर या दरवाजा अटक जाने पर इसका इस्तेमाल किया जा सके।


दोस्तों इमरजेंसी एग्जिट बनाने के लिए भी इसी कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया जाता है।

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