Frogpitara- Bedtime Stories For Kids In Hindi || class 8th || सफल जीवन की 3 अमूल्य बातें

एक पिता द्वारा अपने पुत्र को बताई गयी सफल जीवन जीने की 3 अमूल्य बातें - Moral Stories In Hindi

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Stories For kids In Hindi

- एक गाँव में भोलाराम नाम का एक किसान रहता था, जिसके पिता काफी वृद्ध हो चुके थे। एक दिन भोलाराम को उसके पिता ने अपने पास बुलाया और कहा-

भोला… मेरी मृत्‍यु निकट है और मुझे नहीं लगता कि अब मैं और जीवित रह सकूंगा इसलिए मैं अपने सम्‍पूर्ण जीवन का अनुभव केवल तीन नियमों के रूप में तुझे बताना चाहता हुं, और मुझे विश्‍वास है कि यदि तू केवल इन नियमों का पालन करेगा, तो अपने जीवन में कभी भी किसी भी बडी मुसीबत में नहीं पडेगा-

1. अपने मन की सारी बातें कभी भी अपनी पत्‍नी को मत बताना।
2. कभी भी किसी कांटेदार पेड-पौधे को अपने घर के सामने मत लगाना। और
3. किसी सिपाही से गहरी मित्रता मत रखना।
इतना कहकर भोलाराम के पिता के जीवन की डोर टूट गई। धीरे-धीरे समय बीता लेकिन भोलाराम को पिता की बताई गई तीनों बातों पर कभी भी पूरी तरह से विश्‍वास न हो सका। उसे हमेंशा लगता था कि-


अपने मन की सारी बातें पत्‍नी से न बताना, इसमें कहां की समझदारी है। पत्‍नी को तो यदि सभी बातें पता हों, तो किसी विकट परिस्थिति में वह काफी बेहतर सलाह या मदद दे सकती है। घर के सामने कांटे दार पेड-पौधे लगाने से कोई अनजान व्‍यक्ति जल्‍दी से घर में प्रवेश नहीं कर सकता, जिससे घर अधिक सुरक्षित रहता है और यदि कोई सिपाही अपना परम मित्र हो, तो कभी भी राजा से कोई खतरा नहीं हो सकता।

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पिता द्वारा बताई गई तीनों बातें हमेंशा उसे परेशान करती रहती थीं इसलिए अपने मन की शान्ति के लिए वह एक साधु के पास गया व पिता द्वारा बताई गई तीनों बातें उसने साधु से कही तथा ये भी बताया कि उसे पिता द्वारा कही गई तीनों ही बातें सही नहीं लगतीं इसलिए तीनों बातों को परखना चाहता है।

भोलाराम की बात सुनकर साधु ने भोला को एक ऊपाय बताया, जिसे सुनकर भोलाराम खुशी-खुशी साधु के आश्रम से विदा हुआ और जब घर पहुंचा तो उसके हाथ में एक कपडे में लिपटा हुआ छोटे मटके जैसा कुछ था, जिसे वह जल्‍दी-जल्‍दी अन्‍दर ले गया और कमरा बन्‍द कर दिया। थोडी देर बात जब वह बाहर आया तो उसकी पत्‍नी पूछा- क्‍या लाए थे और दरवाजा बन्‍द करके अन्‍दर क्‍या कर रहे थे … ?

भोला ने जवाब दिया कि-

राजा हमें बहुत परेशान करता है… इस वर्ष वर्षा न होने के बावजूद राजा ने हम पर कर (Tax) लगा दिया है… राजा को हमारी कोई परवाह नहीं है… इसलिए जब मैंने राजा के पुत्र को अकेले देखा, तो मैं सहन न कर सका और मैंने राजा के पुत्र की हत्‍या कर दी तथा उसका सिर काट कर ले आया और दरवाजा बन्‍द करके मैं उसके सिर को ही खड्डा खोदकर गाड रहा था। तुम किसी से भी इस बात का जिक्र मत करना अन्‍यथा राजा मुझे मृत्‍यु दण्‍ड से कम सजा नहीं देगा।

भोलाराम की पत्‍नी असमंजस व घबराहट की स्थिति में भोला को देखती रही लेकिन कुछ कह न सकी। उसे रात भर ठीक से नींद नहीं आई। अगले दिन वह पनघट पर पानी भरने गई, तो उसकी सहेली से उसकी मुलाकात हुई। उसने बताया कि- राजा के पुत्र का किसी ने सिर काटकर उसे मार दिया और सारा राज्‍य उस व्‍यक्ति की तलाश कर रहा है, जिसने ये हरकत की है।

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ये बात सुनते ही भोलाराम की पत्‍नी कांप गई। उसे डरा हुआ देख उसकी सहेली ने कारण पूछा तो उसने बताया कि- राजा के पुत्र को मेरे पति ने ही मारा है और उसका सिर घर में खड्डा खोदकर गाड दिया है, लेकिन ये बात किसी को बताना मत, नहीं तो राजा मेरे पति को मृत्‍यु दण्‍ड दे देगा।


भोलाराम की पत्‍नी की सहेली भी सहम जाती है और ‘हां‘ में सिर हिला देती है लेकिन वह इस बात को सहन नहीं कर पाती और घर पहुंचने से पहले ही अपने साथ आने वाली अपनी पडोसन को बता देती है। इस तरह से ये बात धीरे-धीरे करते हुए राजा तक पहुंच जाती है। परिणामस्‍वरूप राजा के सैनिक भोलाराम को पकडने करने के लिए भोला के घर पहुंचते हैं।

कहाँ है तेरा पति… जिसने राजा के पुत्र को मौत के घाट उतार कर उसका सिर अपने घर में गाड दिया है। बाहर बुला… उसे राजा के समक्ष पेश करने का हुक्‍म है।

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भोलाराम को पकडने आने वाला ये सैनिक वही था, जिसे भोला अपना परम मित्र कहा करता था। उसकी बातें सुन भोलाराम की पत्‍नी सकपका जाती है क्‍योंकि उसे उम्‍मीद नहीं होती कि भोलाराम के बचपन का मित्र, जो कि अक्‍सर भोलाराम से मिलने उसके घर आया करता था, उससे इस तरह से बात करेगा। तभी भोलाराम दरवाजे पर आता है जिसे देखते ही वह सैनिक कहता है- भोला… तुम पर आरोप है कि तुमने राजा के पुत्र की हत्‍या की है और राजा के आदेश के अनुसार मैं तुम्‍हें इस आरोप में गिरफ्तार करने आया हुं। तुम्‍हें हमारे साथ चलना होगा।

उसकी बात सुनकर भोला बोला- मित्र…  तुम मुझे राजा के पास ले जाने आए हो… मैं तुम्‍हारा परम मित्र हूं… हम दोनों साथ ही खेले-कूदे और बडे हुए हैं… क्‍या तुम्‍हें लगता है कि मैं राजा के पुत्र की हत्‍या कर सकता हुँ?

सैनिक न जवाब दिया- इस समय मैं तुम्‍हारा मित्र नहीं, बल्कि राजा का सेवक हुँ और तुम पर राजा के पुत्र की हत्‍या का आरोप है। इसलिए तुम्‍हें मेरे साथ चलना ही होगा अन्‍यथा मुझे तुम्‍हारे साथ जबरदस्‍ती करनी पडेगी।

और इतना कहते हुए वह सैनिक भोला को गर्दन से पकड कर खींचते हुए बाहर ले जाता है, जहां उसके सिर पर रखी पगडी उस कांटेदार पेड पर अटक कर नीचे गिर जाती है, जिसे उसने अनचाहे लोगों को घर में प्रवेश करने से रोकने हेतु लगाया था।

भोलाराम को राजा के समक्ष प्रस्‍तुत किया जाता है जहां राजा भोलाराम से क्रोधित होकर पूछता है- तुमने मेरे पुत्र को क्‍यो मारा?

भोला कहता है… महाराज… मैंने राजकुमार को नही मारा, बल्कि आपका पुत्र जीवित है।

अपने पुत्र के जीवित होने की बात सुनकर राजा को बडी खुशी हुई लेकिन फिर भी उसने पूछा कि- मेरा पुत्र जीवित है तो कहां है?

भोलाराम ने कहा- महाराज… आपका पुत्र मेरे घर पर सुरक्षित है जहां उसे राज महल जैसी ही सुविधा प्राप्‍त है। आप उसकी बिलकुल चिन्‍ता न करें।

राजा को ये बात सुनकर थोडी राहत हुई परन्‍तु फिर भी उसने सोंचा कि राजा के पुत्र का अपहरण करना भी कोई कम बडा गुनाह नहीं है। इसलिए भोलाराम को सजा तो देनी ही होगी, किन्‍तु भोलाराम को सजा देने से पहले राजा जानना चाहता था कि आखिर भोलाराम ने ऐसा क्‍यों किया, जबकि उसे भी इस बात का अन्‍दाजा तो रहा ही होगा कि जब सच्‍चाई पता चलेगी, तो उसे राजकुमार का अपहरण करने की सजा जरूर मिलेगी। सो राजा ने भोलाराम से सवाल किया कि-

तुमने राजकुमार का अपहरण किया है जो कि निश्चित रूप से एक अक्षम्‍य अपराध है और तुम्‍हे इसकी सजा जरूर मिलेगी। लेकिन ये जानते हुए कि तुम क्‍या कर रहे हो और तुम्‍हें क्‍या सजा मिलेगी, तुमने राजकुमार का अपहरण क्‍यों किया ?

राजा के इस सवाल के जवाब में भोला ने कहा कि- मेरे पिता ने मरने से पहले मुझे तीन बातें कही थीं जो कि उनके सारे जीवन का निचोड था लेकिन मुझे उन बातों पर विश्‍वास नहीं हुआ। इसलिए इस बात का पता लगाने के लिए कि पिता द्वारा कही गई बातें कितनी सही हैं, मैं एक साधू के पास गया जो कि आपका राजगुरू है और राजगुरू ने ही मुझे ऐसा करने की सलाह दी, ताकि पिता द्वारा कही गई तीनों बातों की सच्‍चाई पता चल सके।


अब राजा भी थोडा आश्‍चर्य हुआ और राजा भी उन तीनों बातों को जानने के लिए उत्‍सुक हुआ क्‍योंकि राजा को भी महसूस हुआ कि यदि राजगुरू ने किसी कृत्‍य को करने की सलाह दी है, तो बातें जरूर महत्‍वपूर्ण होंगी। सो, राजा ने भोलाराम से कहा-

यदि राजगुरू ने तुम्‍हें राजकुमार का अपहरण करने के लिए कहा है, तो तुम्‍हें सजा दिए जाने का सवाल ही नहीं है, लेकिन हम भी उन तीन बातों को को जानना चाहेंगे, जिसकी सत्‍यता जांचने के लिए तुमने राजकुमार का अपहरण करने तक की हिम्‍मत कर ली।

राजा के सवाल के जवाब में भोलाराम ने अपने पिता द्वारा कही गई तीनों बातें राजा को बताईं, जिन्‍हे सुनकर राजा ने पूछा- तो इस नाटक से तुमने क्‍या पाया? तुम्‍हारे पिता द्वारा कही गईं तीनों बातें सही साबित हुईं या नहीं?

भोलाराम ने जवाब दिया- मुझे आश्‍चर्य है महाराज कि मेरे पिता द्वारा कही गई तीनों ही बातें बिल्‍कुल सही साबित हुईं। मैं जब राजगुरू से मिलकर लौटा तो राजगुरू ने ही मुझे बताया था कि किस समय राजकुमार एकदम अकेले होते हैं, जब आसानी से उनका अपहरण किया जा सकता है। फलस्‍वरूप मैंने उसी समय राजकुमार का अपहरण किया और अपने घर के पिछले हिस्‍से में ले जाकर छिपा दिया, जहां मेरी पत्‍नी बिना मेरी आज्ञा के कभी नहीं जाती।

फिर थोडी देर बाद एक फूटा हुआ तरबूज एक कपडे में लपेटकर लेकर पत्‍नी के सामने गया और उसके सामने ही कमरे के अन्‍दर जाकर दरवाजा बन्‍द कर दिया। जब थोडी देर बाद बाहर आया, तो पत्‍नी ने दरवाजा बन्‍द करने का कारण पूछा, सो मैंने उसे कहा कि मैंने राजकुमार का सिर काटकर घर के अन्‍दर गाड दिया है। चूंकि तरबूज फूटा हुआ था, इसलिए उसमें लाल रंग का पानी गिर रहा था, जिसे मेरी पत्‍नी ने खून समझ लिया और उसे विश्‍वास हो गया कि मैंने सचमुच ही राजकुमार की हत्‍या कर दी है।


मेरे पिता ने कहा था कि कभी भी पत्‍नी को मन की सारी बातें नहीं बतानी चाहिए, लेकिन मैंने ये बात अपनी पत्‍नी को बताई और मेरे पिता की बात सत्‍य साबित हुई, क्‍योंकि ये जानते हुए भी कि राजा को इस बात का पता चलने पर मेरी मृत्‍यु निश्चित है कि मैंने राजा के पुत्र की हत्‍या की है, मेरी पत्‍नी ने ये बात अपनी सहेली को बता दी, जो कि उसे कत्‍तई नहीं बतानी चाहिए थी।

मेरे पिता ने दूसरी बात ये कही थी कि घर के सामने कभी भी कांटेदार पेड नहीं लगाने चाहिए। मुझे लगा कि पिताजी को समझने में सम्‍भवत: भूल हुई है। घर के सामने कांटेदार पेड लगाने से तो अनचाहे जीवों का घर में प्रवेश मुश्किल हो जाएगा जिससे घर अधिक सुरक्षित होगा। लेकिन यहां भी मेरी सोंच गलत साबित हुई और पिता का अनुभव ही सही सिद्ध हुआ।

जब आपकी आज्ञा का पालने करने के लिए मेरा परममित्र, जो कि आपकी सेना में सिपाही है, मुझे एक तरह से घसीटकर राज दरबार ला रहा था, तो मेरी पगडी उसी कांटेदार पेड पर अटककर जमींन पर गिर गई और किसी भी इज्‍जतदार व्‍यक्ति की पगडी का जमींन पर गिर जाना, समाज में उसकी इज्‍जत गिर जाने के समान है, इसलिए घर के बाहर लगे कांटेदार पेड ने मेरी इज्‍जत माटी में मिला दी। यहां भी पिता की बात सही साबित हुई। यदि मैंने पिता की दूसरी बात मानी होती, तो घर के सामने कांटेदार पेड नहीं लगाता फलस्‍वरूप कभी भी मेरी पगडी जमींन पर नहीं गिरती और गांव भर के सामने मेरा अपमान नहीं होता।

पिताजी की तीसरी बात के अनुसार कभी भी किसी सिपाही से गहरी मित्रता नहीं करनी चाहिए, जबकि आपकी सेना का सबसे मुख्‍य सिपाही बचपन से ही मेरा परममित्र रहा है, फिर भी उसे विश्‍वास नहीं रहा कि मैं किसी की हत्‍या नहीं कर सकता। उसने मेरे पक्ष में एक बार भी नहीं सोंचा बल्कि एक मुजरिम के रूप में मुझे राजा के सामने पेश करने की उसे इतनी जल्‍दी थी, कि उसने इस बात का भी ध्‍यान नहीं रखा कि उसके मित्र की पगडी कांटेदार पेड में अटक गई है, जिसका जमींन पर गिरना, समाज में उसकी इज्‍जत गिरने के समान है बल्कि वह तो मुझे ऐसे घसीटते हुए राज दरबार में लाया, जिसकी मुझे उससे बिल्‍कुल उम्‍मीद नहीं थी।

इस तरह से मेरे पिता द्वारा मुझे दी गई तीनों शिक्षाऐं बिल्‍कुल सही साबित हुई और मुझे इस बात का अपार संतोष भी है कि पिता के जीवनभर का अनुभव बिल्‍कुल सही था। अब आप मुझे जो चाहें, वो सजा दे सकते हैं, क्‍योंकि मैंने जो किया, उसका मुझे कोई अफसोस नहीं होगा बल्कि उससे मैंने ये जाना कि अनुभव हमेंशा कल्‍पनाओं से बडा और महत्‍वपूर्ण होता है।


इतना कहकर भोलाराम चुप होगा। राजदरबार के सभी लोगों को भोलाराम की तीनों शिक्षाऐं बहुत अच्‍छी लगीं। स्‍वयं राजा को भी भोलाराम की बातें बिल्‍कुल उपयुक्‍त लगीं। इसलिए राजा ने भोलाराम को कोई सजा नहीं दी और उस दिन के बाद भोलाराम ने अपने पिता की तीनों बातों का हमेंशा ध्‍यान रखा। सबसे पहले घर जाकर उस कांटेदार पेड को जड से काटकर बाहर फैंका और मन ही मन कसम खाई कि कभी भी पत्‍नी को मन की सारी बातें नहीं बताएगा न ही किसी सिपाही या राज-दरबार के किसी व्‍यक्ति से कभी गहरी मित्रता रखेगा।


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