अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस 2018 विशेष- एक ऐसी ताकतवर भारतीय महिला अरुणिमा सिन्हा की कहानी जिसने अपने एक पैर से दुनिया की सबसे ऊँची पर्वत चोटी, माउंट एवेरेस्ट को फतह किया था International Womens Day 2018 Special Indian Powerful Women Story Arunima Sinha Hindi

International Women's Day 2018 - A Story About A Powerful Indian Women Who Climbed On The Top Of The Mount Everest With Only One Leg. Arunima Sinha


अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस  2018 विशेष- एक ऐसी ताकतवर भारतीय महिला की कहानी जिसने अपने एक पैर से दुनिया की सबसे ऊँची पर्वत चोटी, माउंट एवेरेस्ट को फतह किया था

International Womens Day 2018 Special Indian Powerful Women Story Arunima Sinha Hindi
International Women's Day 2018 - Arunima Sinha On Top Of The World

An Indian woman who lost her leg after she was thrown from a moving train, has become the first female amputee to climb Everest. - International Women's Day Special

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को दुनिया भर के कई देशों में मनाया जाता है। यह एक दिन है जब महिलाओं को अपनी उपलब्धियों के लिए डिवीजनों के संबंध में मान्यता प्राप्त है, चाहे राष्ट्रीय, जातीय, भाषाई, सांस्कृतिक, आर्थिक या राजनीतिक हो।

भारत से राष्ट्रीय स्तर की पूर्व वालीबाल खिलाड़ी तथा माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय विकलांग हैं। - अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष 2018




करीब पांच साल पहले एक ट्रेन हादसे में अपना पैर गवां चुकी भारत की पूर्व राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबाल और फुटबॉल खिलाड़ी अरूणिमा सिन्हा ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी 'माउंट एवरेस्ट' को फतह कर एक नया इतिहास रच दिया था। अपने कृत्रिम पैर के सहारे एवरेस्ट फतह करने वाली वह पहली विकलांग भारतीय हैंनैशनल लेवल की वॉलिबॉल प्लेयर अरुणिमा सिन्हा को अप्रैल 2011 में गुंडों ने चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया था। यहां उनका बायां पैर बुरी तरह जख्मी हो गया था और तमाम कोशिशों के बाद भी डॉक्टर्स उनका पैर बचाने में नाकामयाब रहे थे।

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अरुणिमा उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर की निवासी हैं। वह 12 अपैल 2011 में जब लखनऊ से दिल्ली जा रही थीं उस दौरान ट्रेन में चेन खींचे जाने का विरोध करने पर गुंडो ने उन्हें पद्मावती एक्सप्रेस से नीचे फेंक दिया था। वह एक चलती हुई ट्रेन से टकराईं और बुरी तरह घायल हो गईं थीं। इलाज के दौरान डाक्टरों ने उसकी जान बचाने के लिए उसका बायां पांव काट दिया गया था। डॉक्टरों का जोर इसी पर था कि उनकी कटी हुई टांग में इन्फेक्शन न फैले और घाव जल्द से जल्द भर जाएं। उन्हें नकली पैर लगाना पड़ा था। अरुणिमा की रीढ़ की हड्डी में भी तीन फैक्चर पाए गए थे। उनके दाएं पैर की भी दो हड्डियां टूटी हैं जिन्हें ठीक करने के लिए कुछ दिन बाद ऑपरेशन किया जाए।

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25 साल की अरुणिमा टाटा समूह के 'इको एवरेस्ट अभियान' की टीम मेंबर के तौर पर शिखर पर चढ़ी थीं। 'माउंट एवरेस्ट' पर फतह पाकर अरुणिमा ने एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली विकलांग भारतीय महिला का रिकॉर्ड अपने नाम कर लियाअरुणिमा के साथ पर्वतारोही लवराज भी एवरेस्ट पर पहुंचे थे

उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर जिले के भारत भारती संस्था ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली इस विकलांग महिला को सुल्तानपुर रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किये जाने की घोषणा की। सन 2016 में अरुणिमा सिन्हा को अम्बेडकरनगर रत्न पुरस्कार से अम्बेडकरनगर महोत्सव समिति की तरफ से नवाजा गया था। तथा इन्हें पद्मश्री से भी नवाजा जा चूका है

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President Pranav Mukharji Presents PadmShri To Arunima Sinha

अरुणिमा पहले ही लद्दाख में 21000 फ़ीट की ऊंचाई तय कर चुकी थी। इस बार वह 8000 फीट और ऊंची चढ़ाई चढ़कर एवरेस्ट पर जाना चाहती थीं और इतिहास बनाना चाहती थी जो उन्होंने अपने हौसले से कर दिखाया। देश की ऐसी बेटी पर हर कोई नाज कर रहा है

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