रेबीज वैक्सीन के जनक लुई पास्चर की जीवनी Rabies Vaccine - Biography Of Louis Pasteur In Hindi

Rabies Vaccines: Biography Of Louis Pasteur In Hindi - रेबीज टीका के जनक, लुई पास्चर की जीवनी

Louis Pasteur Biography In Hindi



लुई पास्चर की इस खोज से न जाने कितने लोगों की जान बचायी गयी है, जो रेबीज़ से ग्रसित हुए।

Louis Pasteur Ki Jeevani In Hindi - रेबीज वैक्सीन के जनक लुई पास्चर की जीवनी




आप यह तो जानते ही होंगे की यदि कोई जानवर किसी इंसान को काट लेता है, तो उसे रेबीज का टीका लगवाना पड़ता है। एंटी रेबीज़ टीके के जनक, लुई पास्चर का जन्म फ्रांस के डोल नामक स्थान पर हुआ था।
उनके पिता चमड़े के साधारण व्यवसायी थे। पिता की इच्छा थी की उनका पुत्र पढ़-लिखकर कोई महान आदमी बने। पिता के साथ हाथ बँटाते हुए लुई ने अपने पिता की इच्छा पूरी करने के लिए अरबोय की एक पाठशाला में प्रवेश ले लिया, किन्तु वहाँ की पढ़ाई उनकी समझ में नहीं आती थी।


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स्कूल में उन्हें मंदबुद्धि और बुद्धू कहकर चिढ़ाया जाता था। उपेक्षा से दुखी होकर लुई ने पढाई छोड़ दी। पिता द्वारा पुनः जोर-जबरजस्ती करने पर वह उच्च शिक्षा के लिए पेरिस गए और वहीँ पर वैसाको के एक कलाज में अध्ययन करने लगे।
वह रसायन शास्त्र के विद्वान डॉ. ड्यूमा से विशेष प्रभावित थे। इकोलनारमेल कॉलेज से उपाधि ग्रहण कर पॉस्चर ने 26 वर्ष की अवस्था में रसायन की बजाय भौतिक विज्ञान पढ़ना प्रारम्भ किया। कुछ ही समय वह विज्ञान विभाग के अध्यक्ष बन गए। साल 1849 में फ्रांस के शिक्षा मंत्री ने उनको दिजोन के विद्यालय में भौतिकी पढ़ाने के लिए नियुक्त कर दिया।

एक वर्ष बाद वह स्ट्रासबर्ग विश्विद्यालय में रसायन विज्ञान का स्थानापन्न प्राध्यापक बना दिए गए। इस उन्नति का रहस्य यह था की विश्वविद्यालय अध्यक्ष की बेटी से उनका विवाह हो गया था। विवाह के बाद उनकी रूचि रसायन विज्ञान से हटकर जीव विज्ञान की ओर अग्रसर होने लगी। उन्होंने विषैले वायरस वाले भयानक कुत्तों पर काम किया और एंटी रेबीज़ वैक्सीन तैयार की।


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उनकी यह खोज बड़ी महत्वपूर्ण थी। इस टीके को उन्होंने एक स्वस्थ कुत्ते की देह में पहुँचाया। टीके की चौदह सुइयाँ लगाने के बाद रेबीज़ के प्रति वह रक्षित हो गया। एंटी रेबीज़ वैक्सीन या अलर्क निरोधी वैक्सीन उस स्थिति में दिया जाता है, जब किसी व्यक्ति को पागल कुत्ता, गीदड़, भेड़िया आदि काट लेता है, क्योंकि इनकी लार में नन्हे जीवाणु होते हैं, जो रेबीज़ वायरस कहलाते हैं।




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